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कैंसर को नष्ट करने वाला पत्ता जिसके बारे में डॉक्टर आपको नहीं बता रहे! बारबरा ओ’नील का दृष्टिकोण

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कैंसर उपचार पर दवा उद्योग की आलोचना: एक गहन दृष्टि

प्राकृतिक स्वास्थ्य की समर्थक बारबरा ओ’नील ने कैंसर उपचार के प्रति फार्मास्यूटिकल उद्योग के दृष्टिकोण पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका मानना है कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था अक्सर रोग के मूल कारण को समझने और ठीक करने के बजाय केवल लक्षणों को नियंत्रित करने पर अधिक ध्यान देती है। ओ’नील के अनुसार, कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसे पारंपरिक उपचार कैंसर कोशिकाओं को नष्ट तो कर सकते हैं, लेकिन साथ ही वे स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कई बार गंभीर दुष्प्रभाव सामने आते हैं।

Nature Reviews Cancer में 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन ने संकेत दिया कि कीमोथेरेपी ट्यूमर को छोटा करने में मदद करती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह कैंसर कोशिकाओं की सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को सक्रिय करके उनके बढ़ने में भी योगदान दे सकती है (Meads et al., 2017)। यह निष्कर्ष ओ’नील के इस विचार को बल देता है कि कैंसर उपचार में अधिक समग्र और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

कैंसर के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण को समझना

बारबरा ओ’नील का कहना है कि कैंसर कुछ विशेष जैविक परिस्थितियों में तेजी से पनपता है। इनमें मुख्य रूप से उच्च ग्लूकोज़, कम ऑक्सीजन और अम्लीय वातावरण शामिल हैं।

कैंसर को नष्ट करने वाला पत्ता जिसके बारे में डॉक्टर आपको नहीं बता रहे! बारबरा ओ’नील का दृष्टिकोण

1. उच्च रक्त शर्करा स्तर

Cell Metabolism में 2020 के एक अध्ययन के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में लगभग 15 गुना तेजी से ग्लूकोज़ को अवशोषित करती हैं, क्योंकि उन्हें वृद्धि के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है (Pavlova & Thompson, 2020)। यही कारण है कि कम शर्करा वाला आहार कैंसर के जोखिम को घटाने में सहायक माना जाता है।

2. ऑक्सीजन की कमी

डॉ. ओटो वारबर्ग द्वारा 1931 में वर्णित “वारबर्ग इफेक्ट” बताता है कि कैंसर कोशिकाएं सामान्य एरोबिक श्वसन के बजाय ग्लूकोज़ के किण्वन पर अधिक निर्भर रहती हैं। Science Translational Medicine में 2019 की एक रिपोर्ट ने भी यह दर्शाया कि कम ऑक्सीजन वाला वातावरण कैंसर के फैलाव और आक्रमण को बढ़ावा देता है (Semenza, 2019)।

3. अम्लीय वातावरण

जब ग्लूकोज़ का किण्वन होता है, तो लैक्टिक एसिड जमा होने लगता है, जो ट्यूमर के विकास के लिए अनुकूल स्थितियां बना सकता है। Cancer Research में 2021 के एक अध्ययन के अनुसार, ट्यूमर के आसपास की अम्लीयता प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर सकती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक रक्षा क्षमता कम हो जाती है (Fischer et al., 2021)।

ऑलिव लीफ एक्सट्रैक्ट: एक शक्तिशाली प्राकृतिक विकल्प

बारबरा ओ’नील जिन प्राकृतिक उपायों का समर्थन करती हैं, उनमें ऑलिव लीफ एक्सट्रैक्ट प्रमुख है। जैतून की पत्तियों में ओलियूरोपीन नामक यौगिक पाया जाता है, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है।

International Journal of Molecular Sciences में 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन ने दिखाया कि ओलियूरोपीन PI3K/Akt/mTOR pathway को अवरुद्ध करके स्तन और प्रोस्टेट कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा कर सकता है (González-Vallinas et al., 2022)। इसके अलावा, Oncotarget में 2018 के एक अध्ययन ने बताया कि ओलियूरोपीन कोलोरेक्टल कैंसर कोशिकाओं में एपोप्टोसिस, यानी नियोजित कोशिका मृत्यु, को प्रेरित कर सकता है (D’Angelo et al., 2018)।

कैंसर से लड़ने में आहार की भूमिका

बारबरा ओ’नील कैंसर की रोकथाम में भोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर देती हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों से समर्थित कुछ लाभकारी खाद्य पदार्थ निम्न हैं:

लाभकारी खाद्य पदार्थ

  • टमाटर और जैतून का तेल: टमाटर में मौजूद लाइकोपीन शरीर द्वारा बेहतर तरीके से तब अवशोषित होता है जब इसे जैतून के तेल के साथ लिया जाए। Journal of the National Cancer Institute के अनुसार, यह प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है (Giovannucci et al., 2018)।

  • दलहन: Advances in Nutrition में 2020 के अध्ययन ने पाया कि दलहन-समृद्ध आहार कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम को लगभग 22% तक कम कर सकता है (Aune et al., 2020)।

  • नींबू: स्वाद में अम्लीय होने के बावजूद, नींबू शरीर की संतुलित रासायनिक प्रक्रिया में सहायक माना जाता है। Food Chemistry के 2021 अध्ययन ने बताया कि नींबू में पाया जाने वाला लिमोनीन सूजन को कम करने में मदद करता है और स्तन कैंसर के जोखिम को घटाने से जुड़ा हो सकता है (Bello et al., 2021)।

  • गहरे हरे पत्तेदार साग: पालक, केल और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में क्लोरोफिल प्रचुर मात्रा में होता है। Molecular Nutrition & Food Research के अनुसार, यह डीएनए को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में मदद कर सकता है (Egner et al., 2019)।

  • मेवे और बीज: बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। The American Journal of Clinical Nutrition के अनुसार, ये सूजन कम करने में सहायक हैं (Baer et al., 2021)।

किन खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए

बारबरा ओ’नील कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के प्रति भी सावधान करती हैं, जो कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

जोखिम बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ

  • रिफाइंड शुगर: Nature Communications में 2020 के अध्ययन ने अधिक चीनी सेवन को स्तन कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा (Liu et al., 2020)।

  • जेनेटिकली मॉडिफाइड गेहूं: आधुनिक गेहूं की कई किस्मों में ग्लूटेन और एमायलोपेक्टिन A का स्तर अधिक पाया जाता है, जो सूजन को बढ़ावा दे सकता है (Smith et al., 2019)।

  • पुराना चीज़: लंबे समय तक परिपक्व किए गए चीज़ में टायरामीन का स्तर अधिक हो सकता है, जो दीर्घकालिक सूजन से संबंधित माना गया है (Zheng et al., 2021)।

  • अत्यधिक कैफीन: European Journal of Nutrition के अनुसार, प्रतिदिन 400 मि.ग्रा. से अधिक कैफीन लेने पर कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जो कैंसर की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकता है (Loftfield et al., 2019)।

निष्कर्ष: कैंसर के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता

बारबरा ओ’नील इस बात पर जोर देती हैं कि कैंसर उपचार के वैकल्पिक और प्राकृतिक विकल्पों के बारे में लोगों को शिक्षित करना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार अपनाकर, प्राकृतिक उपायों का विवेकपूर्ण उपयोग करके और जीवनशैली में सुधार लाकर व्यक्ति अपने कैंसर जोखिम को कम कर सकता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी धीरे-धीरे इन विचारों के कुछ पहलुओं का समर्थन कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि पारंपरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण का संयोजन बेहतर परिणाम दे सकता है।

उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति को कैंसर उपचार के बारे में सूचित निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। लोगों को पारंपरिक चिकित्सा के साथ-साथ प्राकृतिक विकल्पों की जानकारी भी होनी चाहिए। भविष्य का कैंसर उपचार संभवतः केवल दवाओं पर आधारित न रहकर एक अधिक व्यापक रणनीति अपनाएगा, जिसका उद्देश्य ऐसा स्वस्थ शरीर बनाना होगा जिसमें कैंसर के पनपने की संभावना कम हो।