समुद्री मछलियों में पारा (Mercury) कैसे जमा होता है?
पारा एक भारी धातु है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं और औद्योगिक प्रदूषण के माध्यम से नदियों, समुद्रों और महासागरों में पहुँच जाती है। सूक्ष्म जीवाणु (बैक्टीरिया) इस पारे को बदलकर मिथाइलमरकरी (methylmercury) बना देते हैं, जो इसकी सबसे विषैली और खतरनाक रूप है।
जब प्लवक (plankton) मिथाइलमरकरी से दूषित हो जाते हैं, तो छोटी मछलियाँ उन्हें खाती हैं, फिर बड़ी मछलियाँ उन छोटी मछलियों को खाती हैं। इस तरह खान-पान की श्रृंखला में चलते‑चलते पारा मछलियों के शरीर में जमा होता रहता है।
मछली जितनी बड़ी और उम्र में जितनी पुरानी होती है, उसके शरीर में पारे की मात्रा आमतौर पर उतनी ही अधिक पाई जाती है।
सबसे अधिक पारा वाली मछलियाँ
1. शार्क (Shark)
- शार्क लंबे समय तक जीवित रहती हैं और मुख्य रूप से दूसरी मछलियों तथा समुद्री जीवों को खाती हैं।
- लंबे जीवनकाल और शीर्ष शिकारी होने की वजह से उनके शरीर में पारा बहुत अधिक मात्रा में जमा हो जाता है।
- शार्क का नियमित सेवन तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर बुरा असर डाल सकता है और पारा विषाक्तता (mercury poisoning) का जोखिम बढ़ाता है।
2. स्वोर्डफिश (Swordfish)
- स्वोर्डफिश एक बड़ी शिकारी मछली है, जो उच्च पारा स्तर के लिए बदनाम है।
- गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छोटे बच्चों को स्वोर्डफिश से दूर रहने की सलाह दी जाती है, क्योंकि पारा भ्रूण और बच्चों के मस्तिष्क विकास को नुकसान पहुँचा सकता है।
3. बिगआई ट्यूना और येलोफिन ट्यूना (Bigeye & Yellowfin Tuna)
- हल्की डिब्बाबंद ट्यूना (canned light tuna) में पारा अपेक्षाकृत कम होता है।
- लेकिन बिगआई ट्यूना और येलोफिन ट्यूना जैसी बड़ी प्रजातियों में पारे का स्तर काफी ऊँचा पाया जाता है।
- इन प्रकार की ट्यूना मछलियों का बार‑बार सेवन करने से पारा शरीर में अधिक मात्रा में जमा हो सकता है।
4. किंग मैकेरल (King Mackerel)
- किंग मैकेरल सबसे अधिक पारा‑दूषित मछलियों में से एक मानी जाती है।
- इसमें पारे की मात्रा इतनी अधिक हो सकती है कि इसका नियमित या बार‑बार सेवन स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित माना जाता है।
5. टाइलफिश (Tilefish)
- टाइलफिश विशेष रूप से मैक्सिको की खाड़ी (Gulf of Mexico) में पाई जाती है।
- यह मछली भी पारा संदूषण के उच्च स्तर के कारण जोखिम वाली श्रेणी में आती है और इसे अक्सर उच्च पारा वाली मछलियों की सूची में शामिल किया जाता है।
उच्च पारा वाली मछलियाँ खाने के स्वास्थ्य जोखिम
अत्यधिक पारा युक्त मछलियों का अधिक या बार‑बार सेवन कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकता है, जैसे:

- तंत्रिका तंत्र को नुकसान, विशेष रूप से गर्भ में पल रहे शिशु और छोटे बच्चों में
- गुर्दे (किडनी) और यकृत (लिवर) पर बुरा प्रभाव, क्योंकि ये अंग पारा को छानने और बाहर निकालने की कोशिश करते हैं
- वयस्कों में स्मरण शक्ति (मेमोरी) और एकाग्रता (कन्सन्ट्रेशन) से जुड़ी समस्याएँ
- पाचन तंत्र की गड़बड़ियाँ और प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) की कमजोरी
- हाथ‑पैरों में झुनझुनी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसे पारा विषाक्तता के लक्षण
कम पारा वाली, अधिक सुरक्षित मछलियाँ
सौभाग्य से कई ऐसी मछलियाँ भी हैं जिनमें ओमेगा‑3 फैटी एसिड और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं, लेकिन पारा अपेक्षाकृत कम होता है। स्वस्थ विकल्प के रूप में आप इन मछलियों को चुन सकते हैं:
- सैल्मन (Salmon)
- सार्डिन (Sardines)
- ऐन्चोवीज़ (Anchovies)
- तिलापिया (Tilapia)
- कॉट (Cod)
इन मछलियों का संतुलित मात्रा में सेवन करने से आप ओमेगा‑3, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्राप्त कर सकते हैं, जबकि पारा का जोखिम कम रहता है।
मछली खरीदते और खाते समय उपयोगी सुझाव
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छोटी मछलियाँ चुनें:
बड़ी और उम्रदराज मछलियों की बजाय छोटी मछलियाँ लें, क्योंकि उनमें आमतौर पर पारे की मात्रा कम होती है। -
गर्भावस्था के दौरान सावधानी बरतें:
गर्भवती महिलाएँ, गर्भधारण की योजना बनाने वाली महिलाएँ और छोटे बच्चे उच्च पारा वाली मछलियों (जैसे शार्क, स्वोर्डफिश, किंग मैकेरल, टाइलफिश, बिगआई और येलोफिन ट्यूना) से बचें। -
सीमा से अधिक सेवन न करें:
उच्च पारा वाली मछलियाँ महीने में एक बार से ज्यादा न खाएँ। संवेदनशील समूह (जैसे गर्भवती महिलाएँ) के लिए इन्हें पूरी तरह छोड़ देना बेहतर हो सकता है। -
विश्वसनीय दिशानिर्देशों का पालन करें:
यदि किसी मछली के पारा स्तर को लेकर संदेह हो, तो FDA (यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और EPA (एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी) या अपने देश की स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा जारी दिशानिर्देशों और सलाह का पालन करें।
सही जानकारी और समझ‑बूझ के साथ मछली का चुनाव करके आप समुद्री भोजन के पोषण लाभ भी ले सकते हैं और पारा से जुड़ी जोखिमों को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।


