बेली कूपर की साहस भरी आख़िरी यात्रा
2016 में बेली कूपर को स्टेज 3 नॉन-हॉजकिंस लिम्फोमा का पता चला। इतनी गंभीर बीमारी के बावजूद उसने अद्भुत हिम्मत और जज़्बे के साथ कैंसर से लड़ाई लड़ी। कई बार उपचार के बाद रोग में सुधार आया, फिर दोबारा वापसी हुई। अंततः जब कैंसर तेजी से उसके सीने, फेफड़ों, जिगर और पेट तक फैल गया, तो डॉक्टरों ने कहा कि उसके पास केवल कुछ ही दिन बचे हैं।
फिर भी, इस कठिन समय में बेली की सबसे बड़ी इच्छा सिर्फ एक ही थी – अपनी नवजात बहन से मिलना। नवंबर में जब उसकी छोटी बहन मिली का जन्म हुआ, तो बेली ने उसे अपनी बाहों में लिया, प्यार से उसका नाम रखा और उसके लिए गहरा स्नेह दिखाया। वह उसकी ओर ऐसे देखता मानो उसे हमेशा के लिए याद रखना चाहता हो।
निस्वार्थ प्रेम और आख़िरी क्रिसमस
जैसे-जैसे क्रिसमस पास आने लगा, बेली ने अपने लिए कुछ भी मांगने के बजाय, पूरे दिल से अपने छोटे भाई के लिए उपहारों की सूची तैयार करवाई। अपनी दर्दनाक और थकाऊ उपचार प्रक्रिया के बावजूद, उसका ध्यान हमेशा अपने परिवार, खासकर भाई–बहन पर ही रहा।

क्रिसमस ईव पर, अनेक तकलीफ़ों और चिकित्सा प्रक्रियाओं से गुज़रने के बाद, बेली शांति से संसार को अलविदा कह गया। उसका परिवार टूट गया, लेकिन वे इस बात में सुकून पाते हैं कि बेली ने कम उम्र में भी असाधारण समझदारी, बहादुरी और निस्वार्थ प्रेम की विरासत छोड़कर गया। उसका साहस और दयालुता हमेशा उनके दिलों में ज़िंदा रहेगी।


