नींद में लार टपकना: कब सामान्य, कब चिंता की बात?
नींद के दौरान लार टपकना (drooling) कई बार पूरी तरह सामान्य होता है, खासकर जब नींद गहरी हो या आप किसी विशेष करवट में सो रहे हों। लेकिन यदि यह बार‑बार हो, बहुत अधिक मात्रा में हो, या धीरे‑धीरे बढ़ता जा रहा हो, तो यह किसी छुपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।
कभी‑कभार लार टपकना आमतौर पर हानिरहित होता है, लेकिन लगातार और अत्यधिक लार बहना श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र या पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों से संबंधित हो सकता है।
नाक बंद होना, साइनस इंफेक्शन या एलर्जी जैसी समस्याएँ आपको मुँह से साँस लेने पर मजबूर कर सकती हैं, जिससे लार अधिक बनने और बहने लगती है। इसी तरह एसिड रिफ्लक्स, स्लीप एपनिया और कुछ न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) रोग भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कुछ दवाएँ भी लार का उत्पादन बढ़ाती हैं, जिसके कारण रात में तकिए पर लार के दाग अधिक दिखाई देते हैं।
यदि नींद में अत्यधिक लार टपकना आपको परेशान कर रहा है, तो इसके संभावित कारणों को समझना और सही इलाज चुनना ज़रूरी है। नीचे छह आम स्वास्थ्य स्थितियाँ दी गई हैं जो रात में ज़्यादा लार बहने के लिए ज़िम्मेदार हो सकती हैं।

1. साइनस इंफेक्शन या एलर्जी
जब साइनस में सूजन, सर्दी या एलर्जी के कारण नाक बंद हो जाती है, तो नाक से साँस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप स्वतः ही मुँह से साँस लेने लगते हैं, जिससे लार बाहर निकलने की संभावना बढ़ जाती है।
- साइनस में सूजन होने पर बलगम (म्यूकस) अधिक बनता है
- नाक से हवा कम जाने के कारण मुँह खुला रहता है
- खुला मुँह लार को रोक नहीं पाता और लार टपकने लगती है
साइनस इंफेक्शन, एलर्जी या सर्दी का सही उपचार करने से नाक की जकड़न कम होती है, जिससे मुँह से साँस लेना और साथ‑साथ लार टपकना भी घट सकता है।
2. गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD)
GERD या एसिड रिफ्लक्स में पेट का एसिड वापस भोजन नली (इसोफेगस) की ओर चढ़ता है। यह एसिड गले और भोजन नली को चिड़चिड़ा कर देता है, जिसके जवाब में शरीर अधिक लार बनाना शुरू कर देता है ताकि एसिड को न्यूट्रल कर सके।
यह स्थिति विशेषकर लेटने पर अधिक महसूस होती है, इसलिए रात में लार टपकना बढ़ सकता है। GERD के अन्य आम लक्षण हैं:
- सीने में जलन या जलन जैसा दर्द
- मुँह में खट्टा या कड़वा स्वाद
- निगलने में हल्की‑फुल्की कठिनाई या असहजता
जीवनशैली में बदलाव (जैसे देर रात भारी भोजन से बचना, मसाले और तैलीय भोजन कम करना), खान‑पान में सुधार और डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएँ GERD को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, जिससे लार टपकने की समस्या भी कम हो सकती है।
3. स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया एक गंभीर नींद विकार है, जिसमें सोते समय बार‑बार साँस रुकने और फिर शुरू होने के एपिसोड होते हैं। जब साँस लेने का पैटर्न बाधित होता है, तो व्यक्ति अक्सर मुँह से तेज साँस लेने लगता है, जिससे लार बहने लगती है।
स्लीप एपनिया के अन्य संकेतों में शामिल हैं:
- बहुत तेज या भयानक खर्राटे
- नींद के दौरान झटके से साँस खींचना या घुटन‑सी महसूस होना
- दिनभर थकान, नींद आना या ध्यान न लगना
बिना इलाज के स्लीप एपनिया दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर और अन्य गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
डॉक्टर निम्न विकल्प सुझा सकते हैं:
- वजन कम करना, धूम्रपान छोड़ना जैसे जीवनशैली सुधार
- CPAP मशीन या अन्य उपकरण, जो सोते समय साँस को खुला रखने में मदद करते हैं
- कुछ मामलों में सर्जरी या अन्य विशेष उपचार
स्लीप एपनिया को नियंत्रित करने से न केवल नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि नींद में लार टपकने की समस्या भी कम हो सकती है।
4. तंत्रिका संबंधी विकार (Neurological Disorders)
कुछ न्यूरोलॉजिकल रोग, जैसे पार्किनसन रोग, स्ट्रोक (आघात) या सेरेब्रल पाल्सी, मांसपेशियों के नियंत्रण और निगलने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। जब जीभ और गले की मांसपेशियाँ ठीक से काम नहीं करतीं, तो मुँह में जमा लार को निगलना मुश्किल हो जाता है, और वह मुँह से बाहर बहने लगती है।
इन स्थितियों में:
- लार दिन और रात दोनों समय अधिक बह सकती है
- बोलने, चबाने और निगलने में भी कठिनाई हो सकती है
ऐसे लोगों के लिए उपचार में शामिल हो सकते हैं:
- स्पीच और स्वैलोइंग (निगलने) थेरेपी
- लार को कम करने या मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली दवाएँ
- कुछ मामलों में इंजेक्शन या सर्जिकल विकल्प
उचित न्यूरोलॉजिकल देखभाल से लार टपकने पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
5. टॉन्सिलाइटिस या गले के संक्रमण
जब टॉन्सिल (गले की ग्रंथियाँ) सूज जाते हैं या गले में संक्रमण हो जाता है, तो निगलना दर्दनाक और कठिन हो जाता है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति लार निगलने से बचता है और लार मुँह में इकट्ठी होती रहती है, जो बाद में सोते समय बाहर बहने लगती है।
इस तरह के संक्रमण के अन्य लक्षण हो सकते हैं:
- गले में तेज दर्द या जलन
- निगलने में दिक्कत
- बुखार
- गर्दन या जबड़े के पास लिम्फ नोड्स का सूज जाना
यदि संक्रमण बैक्टीरिया के कारण हो, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएँ दे सकते हैं। वायरल संक्रमण के मामलों में आराम, गरम पानी, नमक के गरारे, और अन्य घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं। संक्रमण ठीक होने पर लार पर नियंत्रण भी सामान्य हो जाता है और लार टपकना घट जाता है।
6. दवाओं के साइड इफेक्ट
कुछ दवाएँ, विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएँ (जैसे कुछ एंटीसाइकोटिक दवाएँ या अल्ज़ाइमर रोग के लिए दी जाने वाली दवाएँ), लार के उत्पादन को बढ़ा सकती हैं।
जब लार सामान्य से अधिक बनने लगती है, तो सोते समय शरीर उसे पूरी तरह निगल नहीं पाता और वह तकिए पर बह जाती है।
यदि आपको संदेह हो कि किसी दवा की वजह से लार ज़्यादा बन रही है या नींद में लार टपकना शुरू हो गया है, तो:
- दवा अचानक बंद न करें
- अपने डॉक्टर से बात करें
- विकल्पी दवा, अलग खुराक या लेने का समय बदलने जैसे विकल्पों पर चर्चा करें
डॉक्टर की देखरेख में दवा में किया गया छोटा‑सा बदलाव भी लार टपकने की समस्या को काफी कम कर सकता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
नींद में हल्का‑फुल्का लार टपकना आम है, लेकिन निम्न स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है:
- लार लगातार और बहुत ज़्यादा मात्रा में बह रही हो
- निगलने में कठिनाई, गले में फँसने या चॉकिंग जैसा महसूस हो
- साँस लेने में दिक्कत, तेज खर्राटे या नींद के दौरान साँस रुकने जैसी समस्या हो
- शरीर में कमजोरी, बोलने में लड़खड़ाहट या अन्य न्यूरोलॉजिकल बदलाव दिखें
एक चिकित्सक आपके लक्षण, इतिहास और आवश्यकता पड़ने पर टेस्ट के आधार पर सही कारण पहचान सकता है और उपयुक्त उपचार की सलाह दे सकता है।
निष्कर्ष
कभी‑कभार नींद में लार टपकना सामान्य है और आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन यदि यह बार‑बार या अत्यधिक हो रहा है, तो यह किसी छिपे हुए स्वास्थ्य मुद्दे का संकेत हो सकता है।
नींद में ज़्यादा लार बहने के प्रमुख संभावित कारण हैं:
- साइनस इंफेक्शन या एलर्जी से नाक बंद होना
- GERD या एसिड रिफ्लक्स
- स्लीप एपनिया
- तंत्रिका संबंधी विकार
- टॉन्सिलाइटिस और अन्य गले के संक्रमण
- कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
मुख्य कारण की सही पहचान और समय पर उपचार से नींद की गुणवत्ता, दिनभर की ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य—तीनों में सुधार हो सकता है। यदि समस्या लंबी अवधि तक बनी रहती है या अन्य लक्षणों के साथ दिखाई देती है, तो किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम है।


