ओवल ऑफिस में जो बाइडेन की चिट्ठी: ट्रंप के पहले दिन की खास खोज
20 जनवरी 2025 को, ओवल ऑफिस में अपने पहले ही दिन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने पूर्ववर्ती जो बाइडेन द्वारा छोड़ी गई एक चिट्ठी मिली। यह चिट्ठी उन्हें तब मिली जब एक पत्रकार ने सवाल किया कि क्या बाइडेन ने उनके लिए कोई पत्र छोड़ा है। सवाल सुनकर ट्रंप ने रिज़ॉल्यूट डेस्क की दराजें टटोलनी शुरू कीं और वहीं उन्हें यह लिफाफा नजर आया।
“47” के नाम पत्र और ट्रंप की प्रतिक्रिया
दराज में रखे लिफाफे पर “47” लिखा था, जो ट्रंप के 47वें अमेरिकी राष्ट्रपति बनने का संकेत था। ट्रंप ने लिफाफा उठाकर सबको दिखाया और हल्के अंदाज में कहा, “शायद हमें इसे मिलकर पढ़ना चाहिए।”
फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए जोड़ा कि वह पत्र को बाद में अकेले में पढ़ेंगे और फिलहाल उसे अलग रख दिया।
विदाई पत्र की परंपरा: रीगन से शुरू हुआ सिलसिला
राष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले नए राष्ट्रपति के लिए निजी पत्र छोड़ने की परंपरा 1989 से शुरू हुई, जब रोनाल्ड रीगन ने जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के लिए एक मज़ेदार और सौहार्दपूर्ण संदेश लिखा था।
राजनीतिक मतभेद और सत्ता परिवर्तन की तनावपूर्ण स्थितियों के बावजूद, यह परंपरा अमेरिकी लोकतंत्र में शालीनता, शुभेच्छा और निरंतरता का प्रतीक बनी हुई है। जो बाइडेन का ट्रंप के लिए पत्र छोड़ना इसी द्विदलीय परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और उदाहरण है।

बाइडेन की चिट्ठी में क्या हो सकता है?
जो बाइडेन द्वारा ट्रंप के लिए छोड़ी गई इस चिट्ठी की असली सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है। आमतौर पर ऐसे पत्रों में:
- पद की गंभीर जिम्मेदारियों पर निजी विचार
- व्यक्तिगत अनुभवों से निकली सलाह
- आने वाली चुनौतियों के लिए हौसला-अफज़ाई
जैसी बातें शामिल होती हैं।
बाइडेन ने 2021 में बताया था कि जब वे व्हाइट हाउस पहुंचे थे तो उन्हें ट्रंप का छोड़ा हुआ पत्र “बहुत उदार” लगा था, जो यह दिखाता है कि ये चिट्ठियाँ अक्सर सार्वजनिक राजनीति से अलग, ज्यादा व्यक्तिगत और सम्मानपूर्ण होती हैं।
लोकतांत्रिक परंपरा और सततता का प्रतीक
जो बाइडेन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यह चिट्ठी विनिमय अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उन स्थायी परंपराओं को उजागर करता है, जो बदलती सरकारों के बीच भी सम्मान, संस्थागत गरिमा और सततता पर जोर देती हैं।
कड़े राजनीतिक विभाजन और बहसों के बीच भी, व्हाइट हाउस की यह चिट्ठी परंपरा याद दिलाती है कि पद और संस्था, व्यक्तियों और दलों से कहीं अधिक स्थायी और महत्वपूर्ण हैं।


