रात में लार टपकना नजरअंदाज न करें — यह किसी छिपी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे आप प्राकृतिक तरीकों से सुधार सकते हैं
सुबह उठते ही तकिया लार से भीगा मिले, तो यह असहज भी लगता है और कई बार शर्मिंदगी भी हो सकती है। बहुत लोगों के लिए यह शुरुआत में कभी-कभार होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह अक्सर होने लगता है—नींद में खलल, त्वचा में जलन और आत्मविश्वास में कमी तक। खासकर 40 की उम्र के बाद कुछ लोग इसे “उम्र का हिस्सा” मान लेते हैं। लेकिन क्या यह वाकई सामान्य है?
हकीकत यह है कि रात में ज्यादा लार आना (ड्रूलिंग) कई बार शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत हो सकता है—जैसे सांस लेने की समस्या, पाचन संबंधी गड़बड़ी या तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) से जुड़े बदलाव। अच्छी बात यह है कि अक्सर आपका शरीर बस यह बताने की कोशिश कर रहा होता है कि किसी चीज़ पर ध्यान देने की जरूरत है। कारण समझकर आप फिर से सूखी, आरामदायक और गहरी नींद की ओर लौट सकते हैं।

रात में लार आना जितना “नॉर्मल” लगता है, उतना हमेशा होता नहीं
उम्र बढ़ने के साथ नींद के पैटर्न में बदलाव आम हैं, लेकिन रात में जरूरत से ज्यादा लार बनना या लार का मुंह से बाहर निकलना यह संकेत दे सकता है कि शरीर का संतुलन कहीं बिगड़ रहा है। यह केवल असुविधा तक सीमित नहीं रहता—कई लोगों में इससे:
- नींद की गुणवत्ता घटती है
- सुबह थकान और भारीपन रहता है
- लंबे समय में शरीर के अन्य सिस्टम पर भी दबाव बढ़ सकता है
अक्सर लोग जल्दी समाधान के तौर पर बस सोने की मुद्रा बदल देते हैं, लेकिन यह कई बार समस्या को छुपाता है, जड़ से ठीक नहीं करता।
असल में रात में लार ज्यादा क्यों आती है?
रात में अधिक लार टपकने की स्थिति को सायलोरिया कहा जाता है। यह दो मुख्य वजहों से हो सकती है:
- लार का उत्पादन बढ़ जाना
- नींद में निगलने (स्वैलो) की प्रक्रिया कम हो जाना
जब सोते समय मांसपेशियां ढीली होती हैं और व्यक्ति मुंह से सांस लेने लगता है, तो लार आसानी से बाहर निकल सकती है।
नीचे इसके प्रमुख कारण दिए गए हैं:
1) स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)
नींद के दौरान सांस रुक-रुक कर चलने से मुंह खुला रह सकता है, जिससे लार बहने की संभावना बढ़ जाती है। स्लीप एपनिया वाले कई लोगों को सुबह उठते ही बेहद थकान महसूस होती है।
2) एसिड रिफ्लक्स / GERD
पेट का एसिड ऊपर की ओर आने लगे तो शरीर सुरक्षा के तौर पर लार ज्यादा बना सकता है। कई लोगों में सोने से ठीक पहले खाना इस समस्या को बढ़ा देता है।
3) दांतों या जबड़े की समस्या
दांतों का ठीक से न मिलना, जबड़े की बनावट में असंतुलन, या ढीली/गलत फिट डेंचर (नकली दांत) के कारण नींद में मुंह पूरी तरह बंद नहीं हो पाता—और लार बाहर आ सकती है।
4) एलर्जी या नाक बंद रहना
नाक जाम होने पर सांस लेने के लिए मुंह खुल जाता है, और यही रात की ड्रूलिंग का एक बड़ा कारण है। सेलाइन (नमक वाले) पानी से नाक की सफाई कई बार जल्दी राहत देती है।
5) न्यूरोलॉजिकल बदलाव
कुछ स्थितियां तंत्रिकाओं को प्रभावित करती हैं, जिससे मांसपेशियों का नियंत्रण और निगलने की क्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसे मामलों में प्रोफेशनल सलाह लेना जरूरी है।
6) संक्रमण (Infections)
गले का संक्रमण या साइनस इंफेक्शन जैसी समस्याओं में शरीर कभी-कभी प्रतिक्रिया के रूप में लार का उत्पादन अस्थायी रूप से बढ़ा देता है।
7) आंतों/पाचन का असंतुलन
पाचन की गड़बड़ियां लार बनने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती हैं। प्राकृतिक भोजन और प्रोबायोटिक आंतों की सेहत सुधारने में मदद कर सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को फर्क दिखता है।
8) दवाओं के साइड इफेक्ट
कुछ दवाएं लार बढ़ा सकती हैं या मुंह की मांसपेशियों को ज्यादा रिलैक्स कर देती हैं, जिससे ड्रूलिंग की संभावना बढ़ जाती है।
आज से आप क्या कर सकते हैं? (सरल और असरदार उपाय)
कई बार छोटे बदलाव भी बड़ा आराम दे देते हैं:
- सोते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखें (लगभग 6–8 सेमी)
- सोने से 3 घंटे पहले खाना बंद करें
- सेलाइन सॉल्यूशन से नाक की सफाई करें
- भोजन में प्रोबायोटिक-समृद्ध खाद्य शामिल करें
- यदि आप दवाएं लेते हैं, तो डॉक्टर/फार्मासिस्ट से समीक्षा कराएं कि कहीं साइड इफेक्ट तो नहीं
निष्कर्ष
रात में लार टपकना ऐसा संकेत नहीं है जिसे यूं ही टाल दिया जाए। कई बार यह शरीर का सीधा संदेश होता है—और अक्सर इसकी वजह पकड़कर इसे सरल आदतों और लाइफस्टाइल बदलावों से सुधारा जा सकता है। जब आप जड़ कारण पर काम करते हैं, तो रातें ज्यादा सुकूनभरी और सुबहें ज्यादा तरोताजा हो सकती हैं।
अगर समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ अन्य लक्षण (जैसे तेज खर्राटे, सांस रुकना, सीने में जलन, बार-बार गला खराब होना) भी हों, तो प्रोफेशनल सलाह लेना जरूरी है।
याद रखें: शरीर हमेशा संकेत देता है—जरूरत बस उसे समझकर सुनने की है।


